नई दिल्ली। वित्तीय संकट में फंसी टेलीकॉम कंपनियों को सरकार की तरफ से भले ही राहत मिल रही हो, लेकिन बिना टैरिफ बढ़ाये कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों का प्रति यूजर औसत रेवेन्यू जब तक साल 2015 के स्तर पर नहीं आएगा, सरकार की तरफ से मिलने वाले किसी राहत पैकेज का लाभ नहीं होगा।
बुधवार को ही केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को राहत देते हुए स्पेक्ट्रम शुल्क भुगतान को दो वर्ष तक टाल दिया है। हालांकि अभी एजीआर की अदायगी को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है और सचिवों की समिति उस पर विचार कर रही है। बावजूद इसके टेलीकॉम सेक्टर के एक्सपर्ट मान रहे हैं कि इस क्षेत्र के अन्य बकाया मुद्दों का हल ढूंढने के साथ साथ टेलीकॉम क्षेत्र में टैरिफ दरों में बढ़ोतरी को अब टाला नहीं जा सकता।